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शरीर के ६ शत्रु जिनके ऊपर विजय प्राप्ति से ईश्वर प्राप्ति सम्भव है ?

  प्रश्न : शरीर के ६ शत्रु जिनके ऊपर विजय प्राप्ति से ईश्वर प्राप्ति सम्भव है ? उत्तर: काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, द्वेष । संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम स्कन्द / अध्याय ७ / श्लोक ३३ 190925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें द्वारा अनुज मिश्रा

किन परिस्थितियों में " मन " हमारा मित्र और शत्रु बन जाता है?

 प्रश्न : किन परिस्थितियों में " मन " हमारा मित्र और शत्रु बन जाता है? उत्तर:  जब हम मन के ऊपर विजय प्राप्त कर लेते हैं तो मन हमारा मित्र बन जाता है परन्तु मन के ऊपर विजय प्राप्त नहीं होने की स्थिति में मन ही हमारा शत्रु बन जाता है ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय ८  / श्लोक १०                           140925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

शरीर के ६ विकार कौन कौन से हैं?

 प्रश्न : शरीर के ६ विकार कौन कौन से हैं? उत्तर:  जन्म , अनुभूति , वृद्धि , परिणाम , क्षय और विनाश ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय ७  / श्लोक १८              110925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

अभिमन्यु से पूर्व मां के गर्भ में ज्ञान प्राप्त करने वाले कौन थे?

 प्रश्न : अभिमन्यु से पूर्व मां के गर्भ में ज्ञान प्राप्त करने वाले कौन थे? उत्तर:  भक्त प्रह्लाद जिन्होंने अपनी माँ के गर्भ में ही भगवान नारद से धर्म का उपदेश ग्रहण किये थे ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय ५   / श्लोक १५, १६         100925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEO श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान शुक्राचार्य के पुत्र शंड और अर्मक किनके गुरु थे?

 प्रश्न : भगवान शुक्राचार्य के पुत्र  शंड और अर्मक किनके गुरु थे? उत्तर:  भक्त प्रह्लाद के जिन्होंने राजनीती और अर्थनीति का ज्ञान दिए थे ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय ५   / श्लोक १,२                          070925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEO श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

आत्मा शरीर से भिन्न कैसे?

 प्रश्न : आत्मा शरीर से भिन्न कैसे? उत्तर:  सभी प्राणियों का जन्म और मृत्यु उनके द्वारा किये गए पूर्वजन्मों के कर्मों के आधार पर होता है । आत्मा शरीर से अत्यंत भिन्न है इसलिए यह जन्म और मृत्यु से अछूता है।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय २    / श्लोक ४१                         020925-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान विष्णु का जड़ किसको बताया गया है?

 प्रश्न : भगवान विष्णु का जड़ किसको बताया गया है? उत्तर:  धर्म और धर्मोचित कर्म को  ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय २    / श्लोक ११                        280825-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान का दर्शन किस प्रकार से संभव है?

 प्रश्न : भगवान का दर्शन किस प्रकार से संभव है? उत्तर:  आत्ममंथन के द्वारा ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक ९                        240825-1 Video Link: CLICK FOR VIDEOS श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान विष्णु के पार्षद जय और विजय द्वापर युग में कौन थे?

 प्रश्न : भगवान विष्णु के पार्षद जय और विजय द्वापर युग में कौन थे? उत्तर:  शिशुपाल और दन्तवक्र ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक ३२                       180825-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/1SM9AOJ_t2E श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

द्वेष या वैर के माध्यम से भगवत प्राप्ति ज्यादा सरल क्यों?

 प्रश्न : द्वेष या वैर के माध्यम से भगवत प्राप्ति ज्यादा सरल क्यों? उत्तर:  मनुष्य वैर भाव से जितना तन्मय होकर ईश्वर को याद करता है उतना भक्तिभाव से नहीं।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक २६                      170825-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/UYS1oxLuGRU श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान की दृष्टि में भक्ति, भय, स्नेह या कामना में कोई भेद नहीं।

  प्रश्न : भगवान की दृष्टि में भक्ति, भय, स्नेह या कामना में कोई भेद नहीं। उत्तर:  भक्ति से , भय से, स्नेह से या कामना से - जैसे भी हो भगवान में  अपना मन लगा देना चाहिए । भगवान की दृष्टि में इन भावों में कोई भेद नहीं है।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक २५                     160825-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/XOkQWOPoEm8 श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

निंदा,स्तुति, सत्कार और तिरस्कार आत्मा या शरीर का?

 प्रश्न : निंदा,स्तुति, सत्कार और तिरस्कार आत्मा या शरीर का? उत्तर:  शरीर का ही होता है आत्मा का नहीं ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक २३                    080825-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/ElDj4uUHtB0 श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भगवान का वास्तविक रूप क्या है?

 प्रश्न : भगवान का वास्तविक रूप क्या है?  उत्तर:  वास्तव में भगवान निर्गुण, अजन्मा, अव्यक्त और प्रकृति से परे हैं  ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / सप्तम  स्कन्द / अध्याय १   / श्लोक ६                     240725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/s9hexM0J9f8 श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भजन और कीर्तन को प्रभावशाली क्यों बताया गया है?

 प्रश्न : भजन और कीर्तन को  प्रभावशाली क्यों बताया गया है?   उत्तर:  भगवान के नाम का कीर्तन मात्र से ही ब्राह्मण, पिता, गौ, माता , आचार्य इत्यादि की हत्या करने वाले महापापी , चांडाल और कसाई  भी शुद्ध हो जाते हैं  ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १३    / श्लोक ८                210725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/SvRPtzOzunA श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

भक्त प्रहलाद के तीन भाइयों का नाम क्या था?

 प्रश्न : भक्त प्रहलाद के तीन भाइयों का नाम क्या था?   उत्तर:  संह्लाद, अनुह्लाद, ह्लाद ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १८   / श्लोक १२, १३             200725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/w4Di3w4W3hs श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

पत्नी के द्वारा आरम्भ किए गए अनुष्ठान को पूर्ण करने का अधिकारी कौन?

 प्रश्न : पत्नी के द्वारा आरम्भ किए गए अनुष्ठान को पूर्ण करने का अधिकारी कौन?  उत्तर:  यदि पत्नी अनुष्ठान पूर्ण करने के अयोग्य हो जाये तो पति को इस अनुष्ठान को पूर्ण करना चाहिए  नहीं तो धार्मिक दोष लग जाता है ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १९  / श्लोक १८                      190725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/VruENG7V2Es श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

संतान को अकालमृत्यु से बचाने का व्रत का नाम क्या है?

  प्रश्न : संतान को अकालमृत्यु से बचाने का व्रत का नाम क्या है? उत्तर:  पुंसवन व्रत  ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १९  / श्लोक २६, २७          180725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/Kbi-mvzKjkE श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

दानवराज हिरण्यकशिपु की पत्नी कौन थीं?

 प्रश्न : दानवराज हिरण्यकशिपु की पत्नी कौन थीं? उत्तर:  जम्भपुत्री कयाधु ।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १७  / श्लोक २८                   090725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/WYQBBfL-K-0 श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

किन परिस्थितियों में धार्मिक कर्म भी अधर्म बन जाता है?

 प्रश्न : किन परिस्थितियों में धार्मिक कर्म भी अधर्म बन जाता है? उत्तर:  जब किसी धार्मिक कर्म से किसी प्राणी को कष्ट होता है तो इस परिस्थिति में धार्मिक कर्म भी अधार्मिक बन जाता है।  संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १६  / श्लोक ४२                    080725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/2J9efvf-HKM श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा

प्राणियों का मिलना और बिछड़ना काल आधारित कैसे?

 प्रश्न : प्राणियों का मिलना और बिछड़ना काल आधारित कैसे? उत्तर:  जैसे जल के वेग से बालू का कण एक दुसरे से जुड़ते और बिछुड़ते रहते हैं वैसे ही समय के प्रवाह में प्राणियों का भी मिलन और विछोह होता रहता है।     ।           संदर्भ : श्रीमद्भागवत महापुराण /प्रथम खंड / षष्टम स्कन्द / अध्याय १५   / श्लोक ३                   030725-1 Video Link: https://youtube.com/shorts/v5BKeL2Q7LM श्रीमद्भागवत महापुराण  में वर्णित  अन्य प्रश्नोत्तरी के लिए क्लिक करें    द्वारा  अनुज मिश्रा